<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-8552745622679743748</id><updated>2011-07-31T03:19:30.954-07:00</updated><title type='text'>अविराम</title><subtitle type='html'>बढ़े चलो...</subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://aaviram.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8552745622679743748/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://aaviram.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><author><name>प्रशांत पांडेय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17506985219236905390</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>3</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8552745622679743748.post-7947875118526519242</id><published>2010-09-26T07:56:00.000-07:00</published><updated>2010-09-26T07:56:18.443-07:00</updated><title type='text'>मैं तो जी चुप ही रहता हूं !: मदारी का डांडिया न्यूज़</title><content type='html'>अरे भाई आलोक मैं भी स‌ोच रहा हूं एक डांडिया न्यूज खोलने के बारे में क्या ये मदारी कुछ मदद करेगा... या अपने बुढ़े के स‌ाथ अमेरिका और इंग्लैंड की स‌ैर पर निकल गया है... कोई नहीं फिर एक चैनल का नया आइडिया आया  है...चुनाव स‌े पहले लांच करने की तैयारी चल रही है&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8552745622679743748-7947875118526519242?l=aaviram.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://alokranjan1981.blogspot.com/2010/09/blog-post.html?showComment=1284918728557#c6931966556798574459' title='मैं तो जी चुप ही रहता हूं !: मदारी का डांडिया न्यूज़'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://aaviram.blogspot.com/feeds/7947875118526519242/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://aaviram.blogspot.com/2010/09/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8552745622679743748/posts/default/7947875118526519242'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8552745622679743748/posts/default/7947875118526519242'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://aaviram.blogspot.com/2010/09/blog-post.html' title='मैं तो जी चुप ही रहता हूं !: मदारी का डांडिया न्यूज़'/><author><name>प्रशांत पांडेय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17506985219236905390</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8552745622679743748.post-4309982805743305105</id><published>2009-08-19T05:55:00.000-07:00</published><updated>2009-08-19T05:56:32.221-07:00</updated><title type='text'>'हनुमान से बने रावण'</title><content type='html'>पाकिस्तान के कायद-ए-आजम मोहम्मद अली जिन्ना पर जसवंत सिंह ने लिखा क्या कि बीजेपी से उनकी विदाई हो गई। पार्टी रहनुमाओं ने एक पल के लिए ये भी नहीं सोचा कि तीस साल से पार्टी की सेवा कर रहे जसवंत सिंह से एक बार पूछा जाए। कभी पार्टी के संकटमोचक रहे जसवंत सिंह को पल भर में ही रावण बना बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। जसवंत को पार्टी से बाहर होने का मलाल तो है ही। उन्हें ये बात ज्यादा दर्द दे रही है कि बिना किसी औपचारिकता के फोन पर ही पार्टी से निकालने का फरमान सुना दिया गया। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आम आदमी हो या फिर कोई बड़ी शख्सियत अपनों से जुदा होने का दर्द तो सालता ही है, और जसवंत सिंह का तो बीजेपी से तीस सालों का रिश्ता रहा है। ऐसे में जसवंत इस अचानक आए फैसले को पचा नहीं पा रहे हैं। जसवंत का ये दर्द पार्टी के फैसले के बाद उनके प्रेस कांफ्रेंस में नजर आया। उन्हें देखकर लगा कि तेज तर्रार और हमेशा एनर्जी से भरपूर रहनेवाला शख्स अचानक से बुढ़ा हो गया है। थक गया है। अब वो और बोझ नहीं ढो सकता। हालांकि अनुशासन के दायर में हमेशा जीने वाले जसवंत सिंह ने इस मौके पर भी अनुशासन को सर्वोपरि रखा और पार्टी के खिलाफ एक लफ्ज भी उनकी जुबां पर नहीं आया और ना ही उन्होंने कोई ऐसी बात की जिससे पार्टी को नुकसान हो। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जसवंत के खिलाफ पार्टी के फैसले का वीएचपी ने भी समर्थन किया है। लेकिन क्या एक बार सोचना नहीं चाहिए था कि पार्टी के इस कद्दवार नेता को इस तरह से बाहर का रास्ता दिखाना ठीक नहीं है। जसवंत सिंह ने तो सिर्फ अपनी किताब में जिन्ना के बारे में लिखा है और बंटवारे के लिए जिन्ना नहीं पंडित जवाहर लाल नेहरु को जिम्मेदार ठहराया है। लेकिन बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी तो जिन्ना साहब के मजार पर गए और उन्हें धर्मनिरपेक्ष बतायाष। तब भी हो हल्ला मचा था, लेकिन उनके खिलाफ ना तो कोई कार्रवाई हुई और ना ही उन्हें पार्टी से निकाला गया। इतना ही नहीं उस समय आडवाणी जी के पक्ष में बीजेपी के कई नेता खड़े हो गए। पार्टी ने भी उसे गलत नहीं माना। तो क्या आज पार्टी को अनुशासन और जिन्ना याद आए हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जसवंत सिंह का लिखना गलत भी नहीं है। अगर इतिहास के पन्नों में झाका जाए, तो इस बात के प्रमाण मिल जाएंगे कि देश के बंटवारे के लिए कौन जिम्मेदार था। लेकिन लगता है कि बीजेपी को इससे कोई मतलब नहीं है। उसे तो अपनी छवि बरकरार रखनी है और जो भी पार्टी के हार्डलाइन से अलग जाएगा, उसके साथ यही सलूक किया जाएगा। अब तो यही लग रहा है कि शायद जसवंत सिंह की वजह से ही महारानी वसुंधरा राजे का पार्टी से जाना रुक गया। क्योंकि पार्टी एक साथ दो- दो कद्दावार नेता का बगावत झेलने की स्थिति में नहीं है और वो भी एक ही राज्य यानी राजस्थान से। महारानी के समर्थक विधायकों ने दिल्ली पर धावा बोलकर पार्टी को ये तो जता ही दिया था कि अगर उनकी महारानी के खिलाफ कोई फैसला लिया गया, तो बगावत कर देंगे। लगता है कि पार्टी को जसवंत का मुद्दा वसुंधरा की तुलना में ज्यादा बड़ा लगा और महारानी के मामले को फिलहाल रोक दिया गया। लेकिन आज नहीं तो कल उन्हें भी किसी ना किसी बहाने पार्टी से बाहर किया जाएगा। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लोकसभा चुनावों में भारी हार के बाद पार्टी में सशक्त नेतृत्व का अभाव खुलकर सामने आ गया है। पार्टी में आडवाणी के बाद कौन के लिए जंग तो चल ही रही है और उनकी जगह लेने के लिए सुषमा स्वराज और अरुण जेटली शरीखे नेता जी जान से जुटे हुए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पहले से ही बीमार चल रहे हैं और आडवाणी भी अब थक चुके हैं। ऐसे में पार्टी की अंदरुनी राजनीति खुलकर सामने आने लगी है। भले ही तमाम नेता अनुशासन का ढोल पीटते रहते हों या फिर अध्यक्ष जी जब-तब अनुशासन का पाठ पढ़ाते रहते हों। पार्टी का यही हाल रहा तो वो दिन दूर नहीं जब पार्टी को फिर से तीन सीटों से ही संतोष करना पड़ेगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8552745622679743748-4309982805743305105?l=aaviram.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://aaviram.blogspot.com/feeds/4309982805743305105/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://aaviram.blogspot.com/2009/08/blog-post.html#comment-form' title='8 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8552745622679743748/posts/default/4309982805743305105'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8552745622679743748/posts/default/4309982805743305105'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://aaviram.blogspot.com/2009/08/blog-post.html' title='&apos;हनुमान से बने रावण&apos;'/><author><name>प्रशांत पांडेय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17506985219236905390</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>8</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8552745622679743748.post-4840274070125665420</id><published>2009-06-09T17:44:00.000-07:00</published><updated>2009-06-09T17:51:27.829-07:00</updated><title type='text'>पप्पू कौन? वोटर या चुनाव व्यवस्था?</title><content type='html'>अगर आप भारत के नागरिक हैं और लोकसभा चुनावों में वोट डालने नहीं जाते हैं, तो आप पप्पू हैं, ये हम नहीं कह रहे चुनाव आयोग की ओर से जारी सारे विज्ञापनों में यही बताने की कोशिश की गई है... लेकिन आप अगर पोलिंग बूथ पर जाएं, आपके पास मतदाता पहचान पत्र भी हो और पिछले कई चुनावों से आप वोट डालते रहे हों, और तब भी आपको वोट देने का मौका नहीं मिले, तो आप क्या कहेंगे। पप्पू कौन? &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इससे भी बड़ी बात तो ये कि आप उस जगह के स्थायी निवासी हों, आपके नाम पर एक अदद घर भी हो, आपके नाम से बिजली विभाग ने मीटर लगा रखा हो,आप करीब 9 साल से एक ही जगह पर रह रहे हों, आप कई बार वोट डाल चुके हैं और तब भी आपका नाम वोटर लिस्ट से गायब हो, तब भी क्या आप पप्पू कहलाएंगे। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक और दृश्य-आप बिना वोट डाले लौटकर घर आ रहे हों और आपकी बिल्डिंग की कभी रखवाली करने वाला एक नेपाली चौकीदार रास्ते में मिल जाए और ये कहे, कि सर, वोटर लिस्ट में हमारा भी नाम है, तब आपको कैसा लगेगा? &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जी हां, मैं किसी और की नहीं अपनी आपबीती बयान कर रहा हूँ। गुरुवार 7 मई को चौथे चरण में गाजियाबाद में वोट डाला गया। एक पढ़ा-लिखा शहरी होने के नाते मैं भी सुबह उठकर वोट डालने के इरादे से पोलिंग बूथ पर गया। मेरे हाथ में भारत के चुनाव आयोग की ओर से जारी मतदाता पहचान पत्र था। हां भाग संख्या पता नहीं था, लेकिन अपने याददाश्त के मुताबिक और अपनी बिल्डिंग के दूसरे लोगो से मिली जानकारी के आधार पर अपने क्षेत्र के पोलिंग बूथ पर पहुंच गया। वहां बूथ के बाहर बैठे पोलिंग एजेंट से पूछा कि भाई मेरा नाम किस लिस्ट में है और किस बूथ नंबर पर मुझे वोट डालना है, अपनी सूची में देखकर ये बता दो। वहां बेतहाशा भीड़ मौजूद थी, लोग अपने अपने बूथ के बारे में जानकारी हासिल करने की होड़ लगाए थे। धक्का मुक्की हो रही थी, पहले तो मैं, इस अफरा-तफरी में थोडा पीछे हो लिया और अपनी बारी का इंतजार करने लगा। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;काफी देर इंतजार करने के बाद भी जब मेरी बारी नहीं आई, तो मैं आगे बढ़ा और एक बार फिर पोलिंग एजेंट से आग्रह किया। फिर वही हाल... करीब घंटाभर गुजर जाने के बाद मेरा धैर्य जवाब देने लगा, तो मैं भी बाकी लोगों की तरह जबरदस्ती घुस गया। तब जाकर पोलिंग एजेंट को इस बात का ख्याल आया कि मैं काफी देर से खडा हूं। उसने मेरा कार्ड देखा और ये कह चलता किया कि आपका नाम इस बूथ पर नहीं, दूसरे बूथ पर है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वोट देने की लालसा लिए मैं दूसरे बूथ पर जा पहुंचा। वहां भी वैसा ही हाल नजर आया। फिर मैं पोलिंग एजेंट से आग्रह कर खड़ा हो गया। काफी देर इंतजार करने के बाद भी जब बात नहीं बनी, तो उससे कड़क आवाज में कहा कि भाई आखिर तुमने ये लाइन क्यों लगा रखी है, जब अपने पहचान वालों का ही नाम तुम्हें बताना है, तो यहां एक बोर्ड टांग दो कि यहां सिर्फ पहचानवालों की ही पर्ची दी जाती है। कृपया दूसरे लोग यहां लाइन में ना लगें। मेरे इन सवालों ने उसे थोड़ा सचेत किया और वो मेरे जैसे कई लोगों से वोटर कार्ड लेकर सूची में नाम तलाश करने लगा। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;काफी देर बाद मेरी बारी आई। तो उसने एक-एक कर सभी सूचियों में खोज डाला, लेकिन मेरा नाम कहीं नहीं था। मैं हैरान रह गया कि पिछले कई चुनावों में वोट डाल चुका हूं और मेरे पास मतदाता पहचान पत्र भी है, लेकिन इस बार क्या हो गया कि मेरा नाम नहीं है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लेकिन मैं भी हार मानने को तैयार नहीं था, हर कीमत पर अपना नाम खोज वोट डालना चाहता था। मैं पहुंच गया पोलिंग बूथ के अंदर कि शायद वहां पता चल जाए। बूथ के अंदर कुछ कर्मचारी बैठे थे, जिनके पास पूरी सूची मौजूद थी। लोग अपने-अपने नाम खोजने का आग्रह कर रहे थे, तो कुछ नाम नहीं मिल पाने को लेकर बहस भी कर रहे थे। सबकी जुबां पर एक ही सवाल था, कि पिछले कई चुनावों में नाम मौजूद था, वोट भी डाला है और वोटर आईकार्ड भी है, तब मेरा नाम क्यों नहीं है। बाकी लोगों की तरह मैंने भी उस कर्मचारी से नाम खोजने का आग्रह किया, तो उनका सवाल था कि भाग संख्या और वोटर संख्या बताईए। उन्हें शायद इस बात का ध्यान नहीं रहा कि अगर भाग संख्या और वोटर संख्या पता होता तो, मुझे उनके पास जाने की जरुरत ही नहीं पड़ती। मैं सीधे बूथ पर जाता और वोट डाल अपने घर लौट जाता। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जब वहां भी कुछ पता नहीं चल पाया, तब बूथ के अंदर गया, वहां एक बूथ खाली था, जहां कोई वोटर मौजूद नहीं था। मैंने वहां मौजूद पुलिस बल से गुजारिश की, तो उन्होंने अंदर जाने की इजाजत दे दी। मैं अंदर जाकर पोलिंग कर्मचारियों से बात की कि मेरे पास वोटर आईकार्ड है, लेकिन सूची में मेरा नाम नहीं मिल पा रहा, क्या कोई तरीका है कि आईकार्ड को देखकर इससे अंदाजा लगाया जा सके कि आखिर किस सूची में मेरा नाम होगा। तो उस सज्जन ने कहा कि नहीं वोटर कार्ड से कुछ पता नहीं चल पाएगा। आपको भाग संख्या पता करना होगा। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;थक हार कर करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद मैं बिना वोट डाले घर लौटने लगा। लेकिन एक पत्रकार के मन को ये नहीं भाया। सोचा कुछ दूसरे बूथों का चक्कर लगा लिया जाए। क्या पता यहां की तरह दूसरे बूथों पर भी कुछ ऐसा ही हाल हो। आसपास के करीब पांच पोलिंग बूथों पर गया। हर जगह ऐसे दर्जनों लोग मिले, जिनके पास वोटर आई कार्ड तो मौजूद था और पिछले चुनावों में वोट भी डाल चुके थे, लेकिन इस बार नाम लिस्ट से गायब था। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ऐसे में ये सवाल उठता है कि चुनाव आयोग ने वोटर आईकार्ड अनिवार्य करना चाहता है लेकिन वोटर आईकार्ड मौजूद होने के बाद भी लोगों के नाम वोटर लिस्ट से गायब क्यों हैं जबकि उन लोगों का नाम मौजूद हैं, जो ना तो भारत के नागरिक हैं और ना ही उनका कोई स्थायी पता है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;खैर, सबसे जरुरी सवाल कि असली पप्पू कौन? वोट देने के इरादे से घर से निकला और करीब चार घंटे तक धक्के खाकर लौटने वाला वोटर या फिर ऐसी व्यवस्था देनेवाला सिस्टम?&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8552745622679743748-4840274070125665420?l=aaviram.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://aaviram.blogspot.com/feeds/4840274070125665420/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://aaviram.blogspot.com/2009/06/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8552745622679743748/posts/default/4840274070125665420'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8552745622679743748/posts/default/4840274070125665420'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://aaviram.blogspot.com/2009/06/blog-post.html' title='पप्पू कौन? वोटर या चुनाव व्यवस्था?'/><author><name>प्रशांत पांडेय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17506985219236905390</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry></feed>
